UGC NET में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की पात्रता का नियम, NTA ने दी जानकारी
UGC NET में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की पात्रता का नियम, NTA ने दी जानकारी
नई दिल्ली: UGC NET परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर की पात्रता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने स्पष्ट किया है कि UGC NET में असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए पात्र उम्मीदवारों की संख्या कुल परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों की संख्या के आधार पर तय की जाती है।
NTA के अनुसार, असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए कुल उम्मीदवारों की संख्या का 6 प्रतिशत पात्रता के लिए निर्धारित किया जाता है। यह नियम UGC NET की पात्रता प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका मतलब है कि परीक्षा में शामिल कुल उम्मीदवारों की संख्या के आधार पर असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए पात्र उम्मीदवारों की संख्या तय होगी।
री-एग्जाम होने पर क्या होगा?
UGC NET जून 2026 में कुछ विषयों की परीक्षा दोबारा आयोजित की जा रही है। NTA ने स्पष्ट किया है कि री-एग्जाम के कारण असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए पात्र उम्मीदवारों की संख्या कम नहीं होगी।
यदि री-टेस्ट में शामिल उम्मीदवारों की संख्या मूल परीक्षा में शामिल उम्मीदवारों के 6 प्रतिशत के आधार पर तय संख्या से अधिक होती है, तो पात्रता तय करने के लिए अधिक संख्या को आधार बनाया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य री-एग्जाम में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को नुकसान से बचाना है।
तीन विषयों की परीक्षा दोबारा
जून 2026 की UGC NET परीक्षा में इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों के पेपर दोबारा आयोजित किए जा रहे हैं। इन विषयों के प्रश्नपत्रों में तथ्यात्मक, टाइपिंग, अनुवाद और भाषा संबंधी कुछ समस्याएं सामने आने के बाद NTA ने री-एग्जाम कराने का फैसला लिया।
NTA के कार्यक्रम के अनुसार, इंग्लिश और कॉमर्स की परीक्षा 9 सितंबर 2026, जबकि सोशियोलॉजी की परीक्षा 10 सितंबर 2026 को आयोजित होगी।
उम्मीदवारों को क्या समझना चाहिए?
6 प्रतिशत का नियम यह बताता है कि असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए पात्रता केवल न्यूनतम अंक हासिल करने से तय नहीं होती। उम्मीदवारों को अपनी श्रेणी, विषय और संबंधित कटऑफ के आधार पर पात्रता हासिल करनी होती है।
इसलिए UGC NET में अच्छा प्रदर्शन करने के साथ-साथ उम्मीदवारों के लिए विषयवार और श्रेणीवार कटऑफ को समझना भी जरूरी है। NTA की ओर से री-एग्जाम को लेकर जारी स्पष्टीकरण से यह भी साफ है कि परीक्षा प्रक्रिया में बदलाव होने पर उम्मीदवारों की पात्रता संख्या को उनके खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।