CBSE का बड़ा स्पष्टीकरण: 10वीं सर्टिफिकेट के लिए तीसरी भाषा में पास होना अनिवार्य, पर नहीं होगी बोर्ड परीक्षा
CBSE का बड़ा स्पष्टीकरण: 10वीं सर्टिफिकेट के लिए तीसरी भाषा में पास होना अनिवार्य, पर नहीं होगी बोर्ड परीक्षा
नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने तीसरी भाषा (R3) को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच बनी भ्रम की स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। बोर्ड ने घोषणा की है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 9 में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा का कोई पेपर नहीं होगा। हालांकि, 10वीं का पासिंग सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए छात्रों को स्कूल-आधारित परीक्षा (School-Based Assessment) में पास होना अनिवार्य होगा।
यह महत्वपूर्ण निर्देश 10 जुलाई को जारी गाइडलइन्स में दिया गया है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत लागू की जा रही नई तीन-भाषा नीति का एक अहम हिस्सा है।
कक्षा 9 के छात्रों के लिए क्या हैं नए नियम?
CBSE के नए नियमों के अनुसार, सत्र 2026-27 में कक्षा 9 में दाखिला लेने वाले सभी छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाओं का होना अनिवार्य है। जब ये छात्र सत्र 2027-28 में कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा देंगे, तब उन्हें केवल दो भाषाओं की ही बोर्ड परीक्षा देनी होगी। तीसरी भाषा के लिए उन्हें स्कूल स्तर पर होने वाले आंतरिक मूल्यांकन को ही पास करना होगा।
फेल होने पर स्कूल देगा दूसरा मौका
बोर्ड ने सभी स्कूलों को सख्त निर्देश दिए हैं कि यदि कोई छात्र तीसरी भाषा के स्कूल-आधारित मूल्यांकन में असफल हो जाता है, तो 10वीं का फाइनल बोर्ड रिजल्ट घोषित होने से पहले उसे दोबारा परीक्षा देने का अवसर दिया जाए। यह स्कूल की जिम्मेदारी होगी कि वह छात्र की तैयारी में मदद करे ताकि उसे 10वीं का सर्टिफिकेट मिलने में कोई बाधा न आए।
कक्षा 9 में फेल होने पर भी नहीं रुकेगा प्रमोशन
CBSE ने राहत देते हुए यह भी साफ किया है कि यदि कोई छात्र कक्षा 9 में तीसरी भाषा का मूल्यांकन पास नहीं कर पाता, तब भी उसे कक्षा 10 में प्रमोट कर दिया जाएगा। हालांकि, छात्र को कक्षा 10 की पढ़ाई के दौरान ही अपनी इस लंबित परीक्षा को पास करना होगा।
इस नई व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए NCERT स्कूलों और छात्रों को भाषा सीखने से संबंधित विशेष अध्ययन सामग्री और संसाधन उपलब्ध करा रहा है।
विदेशी भाषा पढ़ने वाले छात्रों को बड़ी राहत
नई नीति के तहत जो छात्र पहले से अंग्रेजी और फ्रेंच या अंग्रेजी और जर्मन जैसी दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहे हैं, उन्हें ‘वन-टाइम’ छूट दी गई है। वे इन भाषाओं की पढ़ाई जारी रख सकते हैं, बशर्ते उन्हें तीसरी भाषा के रूप में किसी एक भारतीय भाषा को अपने पाठ्यक्रम में शामिल करना होगा।
मौजूदा 10वीं के छात्रों पर कोई असर नहीं
बोर्ड ने साफ किया है कि वर्तमान सत्र (2026-27) में जो छात्र पहले से कक्षा 10 में पढ़ रहे हैं, उन पर यह नियम लागू नहीं होगा। वे अपनी वर्तमान दो-भाषा प्रणाली के तहत ही बोर्ड परीक्षा देंगे।
भविष्य में बोर्ड परीक्षा का हिस्सा बनेगी तीसरी भाषा
CBSE ने अपनी दीर्घकालिक योजना साझा करते हुए कहा है कि सत्र 2026-27 में जो छात्र कक्षा 6 में प्रवेश ले रहे हैं, वे जब भविष्य में कक्षा 10 में पहुंचेंगे, तब तीसरी भाषा को मुख्य बोर्ड परीक्षा के विषय के रूप में शामिल किया जाएगा। तब तक इसके लिए नया पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तकें और सभी शैक्षणिक संसाधन पूरी तरह तैयार कर लिए जाएंगे।